About Me

Please visit our Download Section.
Please visit our Download Section.

हनुमान जी को बजरंगबली क्यों कहते है ?

हनुमान जी को बजरंगबली क्यों कहते है ?

भगवान इंद्र ने,हनुमान जी सभी प्रकार के हथियारों और अनेक शक्तियों का आशीर्वाद दिया और उन्हें वज्रादेह(एक हीरे की तरह शरीर) बना दिया,और शक्तिशाली होने के कारण एक उपयुक्त शब्द बली (बलशाली )वज्रदेह के साथ जुड़ गया और वजरंग बली बन गया जो बाद में स्थानीय भाषा में बजरंग बली बन गया,और उन्हें बजरंग बली नाम दिया।

वास्तवि कथा इस प्रकार है ;

हनुमान को बजरंगबली क्यों कहा जाता है, इसके बारे में कई किंवदंतियां हैं। वज्र शब्द का संस्कृत में अर्थ हीरा होता है। क्रिस्टल दांत और हीरे की तरह फर के साथ हनुमानजी के पास सुंदर और बाहुबली विशेषताएं थीं; इसलिए उसकी तुलना हीरे से की गई है। बाली के अर्थ के लिए, बाली शब्द हनुमान जी की दिव्य शक्ति को दर्शाता है जो अपराजेय है और जो मानवता की रक्षा करता है।

यह वास्तव में वज्र-अंग है जिसका अर्थ है, जिसके पास हीरे (वज्र) जैसा शरीर  है जिसे तोड़ा नहीं जा सकता। बलि का अर्थ है जिसके पास शक्ति है।




मारुति, जो की वायु के पुत्र थे ,जिसने सूर्य को फल समझकर खाने की कोशिश की। वायु का पुत्र होने के कारण वह अधिक दूर तक उड़ सकते थे और बहुत ही आसानी से सूर्य तक पहुंच सकते थे । जिस समाय वह सूर्य देव  के तरफ जा रहे थे तो देवताओ के  राजा इंद्रा ने उन्हें राछस समझ लिया और उसे सूर्य का उपभोग करने से रोकने के लिए अपना वज्रयुद्ध फेंक दिया।गुस्से में आकर उन्होंने अपने वज्र से हनुमान जी की ठोढ़ी(ठुड्डी) पर प्रहार किया जिसके चलते वह टुट गई। ठोढ़ी(ठुड्डी) को वैसे संस्कृत में हनु भी कहा जाता है। इसीलिए उनको हनुमान नाम से पुकारा जाता है।  इस घटना के बाद से ही राम भक्त बजरंगबली का नाम हनुमान रखा गया था। 

जब वज्रयुध (इंद्र के हथियार) ने हनुमान जी  को चोट पहुंचाई, तो वे बेहोश हो गए और उनके पिता वायु उनके बचाव में आए, उन्हें एक गुफा में ले गए और क्रोधित हो गए कि उनका बेटा बेहोश हो गया और फिर उन्होंने  दुनिया से सारी हवा (वायु) खींच ली। जैसे ही सभी जीवित प्राणी सांस लेने के लिए संघर्ष कर रहे थे, ब्रह्मा, इंद्र, सूर्य, कुबेर, वरुण, यमराज आदि देवताओं की पूरी सेना वहाँ आई और वायु से अपना कर्तव्य निभाने की याचना की। ब्रह्मा ने इंद्र से अपनी जल्दबाजी और गलती के लिए माफी मांगी और हनुमान जी  की चेतना को पुनर्जीवित किया। यह देख पवन देव शांत हो गए।


वरदानों की बारिश

सभी देवता खुश थे कि वायु को राहत मिली और हनुमान अब ठीक हैं। पवन देव ने हवा को वापस दुनिया में बहाल किया । तब इंद्र ने हनुमान जी को सभी प्रकार के हथियारों से प्रतिरक्षा जैसी शक्तियों का आशीर्वाद दिया और उन्हें वज्रादेह (एक हीरे की तरह शरीर) बना दिया।  सबसे शक्तिशाली होने के कारण, एक उपयुक्त शब्द, "बली" इसके साथ जुड़ गया और वजरंग बली बन गया जो बाद में स्थानीय भाषा में बजरंग बली बन गया, और उन्हें बजरंग बली नाम दिया। सभी देवता इतने प्रसन्न हुए और उन्हें अत्यधिक गति, तेज, ज्ञान, मृत्यु का भय नहीं (चिरंजीवी) जैसे कई वरदान दिए। भगवान ब्रह्मा ने हनुमान को सभी आठ सिद्धियों और नौ भक्ति के साथ एक महान वरदान दिया है कि दुनिया का सबसे घातक हथियार ब्रह्मास्त्र उन्हें कभी नुकसान नहीं पहुंचा सकता है। 

Read also Hanuman ji was Vanar or Monkey in Ramayana

क्यों हुए श्री राम भक्त हनुमान सिंदूरी

हर कोई यह जानता है कि हनुमान जी श्री राम जी के बहुत बड़े भक्त है। क्या आपको पता  है कि श्री राम जी की वजह से ही हनुमान जी सिंदूरी रंग के हो गए थे। दरअसल, जब भगवान श्री राम रावण को मारकर अयोध्या आ रहे थे। तब हनुमान जी ने भी भगवान श्री राम जी के साथ आने की इच्छा जताई। राम जी के बहुत समझने पर भी वह नहीं मानें और उनके साथ अय़ोध्या आ गए। बजरंग बली भगवान हमेशा से ही राम जी की सेवा करके अपना जीवन बिताना चाहते थे। एक बार उन्होंने माता सीता को मांग में सिंदूर भरते  हुए देखा था।


तो हनुमान जी ने  इससे संबंधित सवाल सीता जी पहुंच ही लिया। इस पर माता सीता ने कहा कि वह प्रभु राम को प्रसन्न करने के लिए सिंदूर लगाती है। फिर क्या था इतना सुनने भर से ही हनुमान जी ने सिंदूर का एक बड़ा बक्सा लिया और अपने ऊपर उड़ेल लिया और साधी राम जी के पास चले गए। हनुमान जी को सिंदूर में लिपटा देख राम जी हैरानी में पड़ गए। जब उन्होंने हनुमान जी से ऐसा करने का कारण पहुंचा तो उन्होंने बताया कि सिंदूर लगाने पर आप जैसे माता सीता से प्रसन्न रहते है तो अब आप मुझसे भी उतने ही प्रसन्न रहना। तब श्री राम को अपने भोले-भाले भक्त हनुमान की युक्ति पर बहुत हंसी आई और सचमुच हनुमान के लिए श्री राम के मन में जगह और गहरी हो गई।

क्या आपको पता है रावण ने सीता माता के साथ वनवास के दौरान दुर्व्यवहार क्यों नहीं किया?

देवताओं के राज्य स्वर्गलोक को जीतने के अपने अभियान पर, रावण एक बार कुबेर के शहर अलका के आसपास आराम कर रहा था। यहाँ, उन्हें अप्सराओं की रानी, ​​रंभा मिली, जिन्हें अब तक की सबसे सुंदर महिला माना जाता था। यह जानने के बावजूद कि वह विवाहित है, रावण ने उसके साथ दुर्व्यवहार किया और कुबेर के पुत्र नलकुबेर ने उसे श्राप दिया। 

उसे शाप दिया गया था कि अगर उसने कभी किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार किया तो उसका सिर तीन भागों में फट जाएगा। इसलिए रामायण में, हरण करने के बाद भी, देवी सीता के लिए अपने जुनून के बावजूद, वह कभी भी सीता देवी को उससे शादी करने के लिए मजबूर नहीं कर सका क्योंकि उन्हें डर था कि श्राप सच हो जाएगा। वह इस श्राप के डर से सीता माताजी को उनके मर्जी के बगैर छुआ तक नहीं। 


जय बजरंग बलि 

Post a Comment

0 Comments