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What to do when you are confused | जब आप कंफ्यूज हो तो

What to do when you are confused | जब आप कंफ्यूज हो तो

गीता इनसाइट में आप सभी का स्वागत है। भगवद गीता के माध्यम से ,आज के वीडियो में हम आपको ये बताएँगे की मनुष्य को कौन सा कर्म  करना चाहिए। 

कृष्णा चैप्टर १६ में बताते है ,

जो मनुष्य कामनाओं के वश में होकर शास्त्रों की विधियों को त्याग कर अपने ही मन से उत्पन्न की गयीं विधियों से कर्म करता रहता है, वह मनुष्य न तो सिद्धि को प्राप्त कर पाता है, न सुख को प्राप्त कर पाता है और न परम-गति को ही प्राप्त हो पाता है। 

कृष्णा अगले श्लोक में बताते है ;

हे अर्जुन! मनुष्य को क्या कर्म करना चाहिये और क्या कर्म नही करना चाहिये इसके लिये शास्त्र ही एक मात्र प्रमाण होता है, इसलिये तुझे इस संसार में शास्त्र की विधि को जानकर ही कर्म करना चाहिये। 

कृष्णा चैप्टर ३ में बताते हैं।,

सभी मनुष्य प्रकृति के गुणों के अधीन होकर ही कार्य करते हैं, यधपि तत्वदर्शी ज्ञानी भी प्रकृति के गुणों के अनुसार ही कार्य करता दिखाई देता है, तो फिर इसमें कोई किसी का निराकरण क्या कर सकता है? 

सभी इन्द्रियाँ और इन्द्रियों के विषयों के प्रति आसक्ति और विरक्ति नियमों के अधीन स्थित होती है, मनुष्य को इनके आधीन नहीं होना चाहिए, क्योंकि दोनो ही आत्म-साक्षात्कार के पथ में अवरोध उत्पन्न करने वाले हैं। 

अत: हे भरतवंशियों मे श्रेष्ठ! तू प्रारम्भ में ही इन्द्रियों को वश में करके और आत्म-ज्ञान और आत्म-साक्षात्कार में बाधा उत्पन्न करने वाली इन महान-पापी कामनाओं का ही बल-पूर्वक समाप्त कर अपने मन को काबू कर। 

आशा करते है आपलोग कृष्णा के बताये गए मार्ग का अनुसरण जरूर करेंगे। 

तो इस तरह यह वीडियो यही समाप्त होता है। 

मिलते है नेक्स्ट वीडियो में। 

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