.

निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf | Nirajala Ekadashi

 निर्जला एकादशी व्रत कथा (PDF)

संपूर्ण व्रत विधि, महत्त्व, लाभ, नियम एवं पूजा विधि

निर्जला एकादशी हिंदू धर्म की सबसे पुण्यदायी और महत्वपूर्ण एकादशियों में से एक मानी जाती है। यह व्रत ज्येष्ठ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है। इस दिन भगवान श्रीहरि विष्णु की विधिपूर्वक पूजा की जाती है तथा श्रद्धालु बिना अन्न और बिना जल ग्रहण किए उपवास रखते हैं। इस पोस्ट में हमलोगो ने निर्जला एकदशी पीडीऍफ़ शेयर किया है। 

शास्त्रों में कहा गया है कि यदि कोई व्यक्ति वर्ष भर आने वाली सभी एकादशियों का व्रत किसी कारणवश नहीं कर पाता, तो केवल निर्जला एकादशी का व्रत करने से उसे चौबीसों (अधिक मास सहित 26) एकादशियों के व्रत के समान पुण्य प्राप्त होता है।(निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF

इस व्रत का विशेष महत्व महाभारत काल से जुड़ा हुआ है। माना जाता है कि महाबली भीमसेन ने महर्षि वेदव्यास के निर्देशानुसार यही व्रत रखा था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी अथवा पांडव एकादशी भी कहा जाता है।

इस PDF में आपको निर्जला एकादशी का महत्व, व्रत के लाभ, पूजा विधि, आवश्यक नियम, क्या करें और क्या न करें, तथा अंत में संपूर्ण निर्जला एकादशी व्रत कथा प्राप्त होगी।

निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf के Download लिंक नीचे दिए गए हैं।  

निर्जला एकादशी व्रत कथा PDF Download 

निर्जला एकादशी व्रत कथा Hindi PDF Download 

निर्जला एकादशी व्रत कथा का महत्त्व | Importance of Nirjala Ekadashi

निर्जला एकादशी केवल उपवास का पर्व नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि, इंद्रिय संयम और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का श्रेष्ठ अवसर है। निर्जला एकादशी का downlaod लिंक नीचे दिया गया है। Nirajala Ekadashi PDF

इस व्रत के माध्यम से मनुष्य अपने शरीर, मन और आत्मा को पवित्र बनाता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन किया गया जप, दान, पूजा और भक्ति कई गुना फल प्रदान करते हैं।

धार्मिक मान्यता के अनुसार इस व्रत से

  • भगवान श्री विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है।
  • समस्त पापों का क्षय होता है।
  • पूर्वजों को भी पुण्य की प्राप्ति होती है।
  • जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है।
  • अंत समय में भगवान विष्णु का धाम प्राप्त होने का मार्ग प्रशस्त होता है।

निर्जला एकादशी व्रत के लाभ | निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf

निर्जला एकादशी का व्रत अत्यंत फलदायी माना गया है। इसके प्रमुख लाभ निम्नलिखित हैं.

  • वर्ष भर की सभी एकादशियों के समान पुण्य की प्राप्ति होती है। इस व्रत कि सबसे बड़ा खासियत यही है की वर्ष भर की सभी एकादशियों के बराबर की फल प्राप्ति होती है। 
  • भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की कृपा प्राप्त होती है।
  • पापों का नाश होकर मन शुद्ध होता है।
  • धन, धान्य और समृद्धि में वृद्धि होती है।
  • परिवार में सुख-शांति और सौभाग्य बना रहता है।
  • कठिनाइयों एवं बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
  • आध्यात्मिक उन्नति एवं ईश्वर के प्रति भक्ति बढ़ती है।
  • मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

निर्जला एकादशी व्रत में क्या करें? 

  • ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें।
  • स्वच्छ एवं सात्विक वस्त्र धारण करें।
  • भगवान श्री विष्णु एवं माता लक्ष्मी की विधिपूर्वक पूजा करें।
  • पीले पुष्प, तुलसी दल, चंदन एवं फल अर्पित करें।
  • "ॐ नमो भगवते वासुदेवाय" मंत्र का जप करें।
  • विष्णु सहस्रनाम या भगवद्गीता का पाठ करें।
  • दिनभर भगवान का स्मरण एवं भजन-कीर्तन करें।
  • सामर्थ्य अनुसार जल, वस्त्र, अन्न, पंखा, छाता अथवा अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करें।
  • द्वादशी तिथि में विधिपूर्वक पारण करें।

निर्जला एकादशी में क्या न करें? 

  • अन्न एवं जल का सेवन न करें (यदि स्वास्थ्य अनुमति देता हो)।
  • क्रोध, झूठ, कटु वचन एवं विवाद से बचें।
  • तामसिक भोजन, मांस, मदिरा एवं नशीले पदार्थों से दूर रहें।
  • किसी का अपमान या निंदा न करें।
  • हिंसा एवं किसी भी प्रकार के अधर्म से बचें।
  • व्रत के दौरान अधिक सोने से बचें।
  • द्वादशी के पारण में अनावश्यक विलंब न करें।

निर्जला एकादशी व्रत कथा पूजा विधि

निर्जला एकादशी की पूजा निम्न प्रकार से करें

1. प्रातः स्नान

ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

2. संकल्प लें

भगवान विष्णु के समक्ष बैठकर श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी व्रत का संकल्प लें।

3. भगवान विष्णु की पूजा

भगवान विष्णु की प्रतिमा या चित्र को स्वच्छ आसन पर स्थापित करें।

इसके बाद—

  • चंदन अर्पित करें।
  • अक्षत चढ़ाएँ।
  • पीले पुष्प अर्पित करें।
  • तुलसी दल अवश्य चढ़ाएँ।
  • धूप एवं दीप प्रज्वलित करें।
  • नैवेद्य अर्पित करें।

4. मंत्र जाप

इन मंत्रों का श्रद्धापूर्वक जप करें—

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय।

या

ॐ नमो नारायणाय।

5. विष्णु सहस्रनाम एवं गीता पाठ

यदि संभव हो तो विष्णु सहस्रनाम, भगवद्गीता अथवा श्रीहरि के भजन का पाठ करें।

6. व्रत कथा का श्रवण

पूजा के पश्चात श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करें।

7. आरती

भगवान विष्णु एवं माता लक्ष्मी की आरती करें तथा परिवार सहित प्रसाद ग्रहण करें।

महत्वपूर्ण: यदि किसी व्यक्ति की आयु, स्वास्थ्य, गर्भावस्था या चिकित्सकीय कारणों से निर्जल व्रत संभव न हो, तो उसे अपने स्वास्थ्य के अनुसार फलाहार या जल ग्रहण करके श्रद्धापूर्वक भगवान विष्णु की उपासना करनी चाहिए।

निर्जला एकादशी में दान का महत्व

धार्मिक ग्रंथों में निर्जला एकादशी के दिन दान का विशेष महत्व बताया गया है। इस दिन श्रद्धा एवं सामर्थ्य के अनुसार निम्न वस्तुओं का दान शुभ माना जाता है .

  • जल से भरा कलश
  • छाता
  • पंखा
  • वस्त्र
  • अन्न
  • फल
  • दक्षिणा
  • गौ सेवा अथवा गौदान (सामर्थ्य अनुसार)

दान सदैव श्रद्धा, विनम्रता और निष्काम भाव से करना चाहिए।  एकादशी व्रत किसको करना चाहिए ?

निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf

व्रत का पारण कब और कैसे करें?

निर्जला एकादशी का पारण द्वादशी तिथि में निर्धारित समय पर करना चाहिए।

पारण से पूर्व

  • भगवान विष्णु की पुनः पूजा करें।
  • तुलसी युक्त जल अर्पित करें।
  • ब्राह्मण, गौ अथवा जरूरतमंद व्यक्ति को यथाशक्ति दान दें।
  • इसके बाद जल ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
  • सात्विक भोजन से व्रत पूर्ण करें।

विशेष सावधानियाँ

  • निर्जला व्रत अत्यंत कठिन माना जाता है। इसे अपनी शारीरिक क्षमता के अनुसार ही करें।
  • बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएँ, छोटे बच्चे एवं गंभीर रोगों से पीड़ित व्यक्ति चिकित्सकीय सलाह लेकर ही व्रत रखें।
  • व्रत का वास्तविक उद्देश्य केवल भूखा-प्यासा रहना नहीं, बल्कि भगवान विष्णु की भक्ति, संयम, सदाचार और आत्मशुद्धि है।

निर्जला एकादशी व्रत कथा

अब श्रद्धापूर्वक निर्जला एकादशी व्रत कथा का पाठ अथवा श्रवण करें।

(यहाँ अपनी तैयार की हुई निर्जला एकादशी व्रत कथा जोड़ें।)

समापन प्रार्थना

हे भगवान श्रीहरि विष्णु!
हमारी पूजा, व्रत, जप, कथा एवं भक्ति को स्वीकार करें। हमारे समस्त पापों का नाश करें, धर्म के मार्ग पर चलने की शक्ति दें तथा हमें सदैव अपने श्रीचरणों में स्थान प्रदान करें।

॥ ॐ नमो भगवते वासुदेवाय ॥

इस तरह यह निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf पोस्ट यही समाप्त होता है। 

निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf के Download लिंक नीचे दिए गए हैं।  

निर्जला एकादशी व्रत कथा  PDF Download 

If the download link of Narayan Kavach pdf does not work or you feel any other problem with the download link then, please REPORT IT by selecting the appropriate action such as copyright material / promotion content / link is broken etc. 

Disclaimer :Please Note  निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf is a copyright material we will not be providing its pdf or any source for downloading at any cost. We will report to DMCA if this has been violated .

All Download link of निर्जला एकादशी व्रत कथा pdf is secured and placed on google server.

Read Also

Karma Bhagavad Gita Quotes

Adbhut Ramayan in Hindi

Ganesh Kavach pdf 

Ganesh Kavach Ke Faayede

Post a Comment

0 Comments